क्या तुझे मेरी आज कल वैसी ही याद आ रही है। क्या तुझे मेरी आज कल वैसी ही याद आ रही है।
अब पहले जैसा भी कुछ नहीं रहा बस खालीपन है आंखों में सबके और दिल में घोर सन्नाटे . अब पहले जैसा भी कुछ नहीं रहा बस खालीपन है आंखों में सबके और दिल में घोर सन...
कई बार हमारी कोई स्मृति हमें असमंजस में ला छोड़ती है कई बार हमारी कोई स्मृति हमें असमंजस में ला छोड़ती है
खुद को झांक जरा अंदर आग काफी है जिंदगी में बस अब एक उड़ान बाकी है। खुद को झांक जरा अंदर आग काफी है जिंदगी में बस अब एक उड़ान बाकी है।
मुकेश बिस्सा श्री कन्हैया कुंज,4 नवखुनिया, गांधी कॉलोनी,जैसलमेर मुकेश बिस्सा श्री कन्हैया कुंज,4 नवखुनिया, गांधी कॉलोनी,जैसलमेर
पत्थर की इस दुनिया में, पत्थर की इस दुनिया में,